क्या आप भी पीरियड में होने वाले दर्द से बहुत परेशान रहती हैं? क्या पीरियड में होने वाले अधिक ब्लीडिंग के कारण आप उन दिनों कंफर्टेबल महसूस नहीं करती है?क्या पीरियड वाले दिनों में होने वाले प्रॉब्लम के कारण आप घर पर ही रहना चाहती है? क्या आपने कभी जानना चाहा कि आपके साथ पीरियड के प्रॉब्लम होने के कारण क्या आखिर क्या हैं? आपको बता दें कि आप अकेली ऐसी महिला या लड़की नहीं है, जिन्हें पीरियड के साथ कुछ ना कुछ प्रॉब्लम को झेलना पड़ता हैं। 

      अधिकतर महिलाओं और लड़कियों को पीरियड के दौरान बहुत अधिक ब्लीडिंग का होना, पेट और कमर में जोड़ का दर्द होना, बेचैनी घबराहट जैसी प्रॉब्लम  को फेस करना पड़ता है। कई लेडीस के साथ तो ऐसा भी होता है कि वो पीरियड्स के उन 4 दिनों में वह रोजाना के काम भी अच्छे से नहीं कर पाती हैं। आज के कुछ सीखे के इस आर्टिकल में पीरियड के प्रॉब्लम्स क्यों होते है ? इसके बारे में बात करने वाले हैं। आइए समझते हैं पीरियड प्रॉब्लम को विस्तार से : 

किसी महीने पीरियड का नहीं आना

      आजकल कम उम्र में ही रिलेशनशिप में होने से लगभग हर लड़की के पीरियड मिस होने पर उन्हें प्रेगनेंसी का ही डर सताने लगता है, जबकि किसी महीने में पीरियड के नही आने के रीजन में हार्मोनल एक्टिविटी, हेवी वर्क आउट, हाई डोज मेडिसिन और स्ट्रेस आदि भी शामिल हो सकते हैं। यदि आप बहुत तनाव भरी स्थिति से गुजर रही होती हैं, और आपके एक से दो महीने के पीरियड मिस हो रहे होते हैं। तो आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। अचानक से हैवी वर्कआउट के कारण भी महिलाओं के शरीर में हार्मोनल चेंजेस होने लगते हैं, पीरियड्स का हर महीने नहीं आने का ये भी एक कारण हो सकता है।

 पीरियड्स का देरी से आना

 कई महिलाओं में लेट पीरियड की समस्या भी रहती है।  अगर  पीरियड रिपीट टाइम 35 दिन से ज्यादा हो जाएं,  तब इसे लेट पीरियड कहा जाता है।  बदलते लाइफस्टाइल, स्ट्रेस , अनहेल्दी डाइट आदि पीरियड्स लेट होने के कारणों में शामिल हो सकते हैं।  कभी-कभी  सर्दी-जुकाम, बुखार या किसी बीमारी की वजह से ज़ब कभी शरीर कमजोर हो जाते है, तब भी पीरियड लेट हो  सकते हैं। थायराइड, ब्रेस्टफीडिंग भी लेट पीरियड के रीजन में होता है। जब पीरियड आने के ठीक टाइम 1 से 2 दिन पहले ही सेक्स कर लिया जाए, तो फिर पीरियड देरी से आते हैं। 

पीरियड आने के पहले के प्रॉब्लम

     कई महिलाओं और लड़कियों को फिजिकली, मेंटली और इमोशनली बिहेवियर में अननेचुरल बदलाव को पीरियड आने के कुछ समय पहले ही फेस करना पड़ता है। इसे प्रीमेंस्टुअल सिंड्रोम (पीएमएस) कहा जाता है। प्रीमेंस्टुअल सिंड्रोम के सिम्टम्स हर महिला में अलग होते हैं। कुछ महिलाओं में ये हल्का या ना के बराबर होता है, तो कुछ महिलाओं को  ब्लोटिंग/पेट फूलना, ज़्यादा थकान, कुछ बिहेवियरियल चेंजेस जैसे बहुत ज़्यादा मूड स्विंग्स होना, चिड़चिड़ाहट, गुस्सा और उदासी की प्रॉब्लम होती हैं।

अधिक पेनफुल पीरियड्स

    पीरियड के दौरान दर्द होना आम माना जाता है। ये दर्द पेट दर्द, कमर दर्द, सिर दर्द, पीठ दर्द या फिर ब्रेस्ट पेन के साथ हो सकते हैं। हर महीने पीरियड्स के समय सभी महिलाओं और लड़कियों को कुछ या ज्यादा दर्द का सामना करना पड़ता है क्योंकि गर्भाशय इस दौरान अपनी परत को हटाकर उसे माहवारी चक्र के लिए तैयार करता है। इस दौरान गर्भाशय की दीवारें सिकुड़ने लगती है, जब ये कम सिकुड़ती है तब कम दर्द होता है और जब ये ज्यादा सिकुड़ती है तो ज्यादा दर्द होता है। इस दर्दनाक में पीरियड्स को अंग्रेजी में प्राइमरी डिस्मैनोरिया के नाम से जाना जाता है। हालांकि पीरियड के दौरान  दर्द होना सामान्य माना गया है, लेकिन अगर ये दर्द जब बहुत ज्यादा पेनफुल हो, तब अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेना चाहिए। 

हेवी ब्लीडिंग के साथ पीरियड का आना

     यदि आप हैवी ब्लीडिंग के साथ पीरियड्स की प्रॉब्लम्स को झेल रहे है, तो इसे नजरअंदाज ना करें, क्योंकि हैवी ब्लीडिंग गर्भाश्य में फाइब्रॉएड्स होने का कारण भी हो सकता है। इसके अलावा कई बार शरीर में हार्मोनल डिसबैलेंस के कारण भी गर्भाशय की परत काफी मोटी हो जाती है, ऐसे में भी हैवी ब्लीडिंग संभावना होती है। पीरियड के दौरान जरूरत से ज्यादा ब्‍लीडिंग और लंबे समय तक ब्लीडिंग का होना मेनोरेजिया के नाम से जाना जाता है। सामान्य तौर पर हैवी ब्लीडिंग उनके साथ ज्यादा होती है, जिनके पीरियड ड्यूरेशन 7 दिनों से ज्यादा होते है और पीरियड साइकिल 21 दिनों से कम होता है। लंबे टाइम तक पीरियड का रहना, आपके लिए काफी पेनफुल हो सकता है, इसलिए  ऐसी स्थिति में अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

एक महीने में एक से अधिक बार पीरियड का आना

      अधिकतर  ऐसी प्रॉब्लम भी कई 30 से 40 की उम्र की महिलाओं के साथ देखी गई है, जब उन्हें एक महीने में एक से अधिक बार पीरियड का अनुभव होता है। कई महिलाओं में पेल्विक इंफ्लामेटरी डिजीज के कारण वजायनल ब्लीडिंग होती है, जिसके कारण वो दूसरी बार पीरियड जैसा अनुभव करते हैं। जब कभी गर्भाशय के अंदर ट्यूमर बनने लगता है तब यूटेराइन फाइब्रॉयड के कारण भी ऐसा हो सकता है। अधिक गर्भनिरोधक  गोलियों का सेवन भी हार्मोन डिसबैलेंस के कारण भी फिर से ब्लीडिंग का कारण बन सकते हैं।

पीरियड के समय व्हाइट डिस्चार्ज का अधिक होना

      अधिकतर महिलाओं को अपने पीरियड साइकिल के दौरान पतला, गाढ़ा, गंधहीन, सफेद, क्रीमी जैसे अलग-अलग तरह के व्हाइट डिस्चार्ज का अनुभव होता है। पीरियड के टाइम पर इसका कलर सफेद हो जाता है। अधिक मात्रा में व्हाइट डिस्चार्ज होने से ये वजाइना के टिशू को इफेक्ट करने लगते हैं। जिसके कारण दर्द और खुजली जैसे इंफेक्शन होने लगते हैं। 

 तो दोस्तों, आज के कुछ सीखे के इस आर्टिकल में हमनें आपके साथ पीरियड के प्रॉब्लम्स क्यों होते हैं? इससे जुड़ी जानकारी शेयर की है। यदि आपको ये आर्टिकल नॉलेजफूल लगी हो,तो इसे शेयर करें और पीरियड से जुड़ी और कोई जानकारी के लिए अगर आप कोई आर्टिकल पढ़ना चाहते हैं, तो कमेंट पर जरूर बताएं। 

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