ट्विंस प्रेगनेंसी यानि घर में एक साथ दोगुनी खुशी।अगर आप भी ट्विंस प्रेगनेंसी  के खुशनुमा सफर की शुरुआत कर रहे हैं, तो आपको इस दौरान कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा, क्योंकि हर प्रेगनेंट लेडी का शरीर ट्विंस प्रेगनेंसी को आसानी से सहन नहीं कर पाता है। आज हम “कुछ सीखे” के लेख मे ट्विंस प्रेगनेंसी डाइट के साथ-साथ ट्विंस प्रेगनेंसी से जुड़ी और जरूरी जानकारी लेकर आए हैं :-

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 ट्विंस प्रेगनेंसी कैसे होता है? | How twins pregnancy happens

 जब स्त्री का एग (अंडा) और पुरुष का स्पर्म (वीर्य) आपस में मिलते हैं, तब फर्टिलाइजेशन क्रिया करते हैं। इसी के बाद प्रेगनेंसी होता है। इस फर्टिलाइजेशन के दौरान गर्भाशय में पहले से दो एग हो या फिर एक एग दो एम्ब्रीयों (भ्रूण) बंट जाए, तब ऐसी स्थिति में ट्विंस प्रेगनेंसी होती है।

 ट्विंस प्रेगनेंसी दो प्रकार के होते हैं :

 1. आईडेंटिकल – जब फर्टिलाइजेशन में एक एग दो एंब्रियो में बंटता है।  तब इसे मोनोजाईगोटिक  कहते हैं। ऐसी स्थिति में दोनों लिंग समान होंगे। दोनों लड़का होगा या दोनों लड़की होगी।

2. नॉन आईडेंटिकल – जब  गर्भाशय में पहले से ही दो एग उपस्थित हो और स्पर्म दोनों एग के साथ फर्टिलाइज हो जाते है। तब इससे बनने वाले भ्रूण को डिजिगोटिक कहते हैं। इसमें ट्विंस में एक लड़का और एक लड़की होते है।

 ट्विंस प्रेगनेंसी के लक्षण क्या है? | Twins pregnancy symptoms 

      ट्विंस प्रेगनेंसी सामान्य प्रेगनेंसी की अपेक्षा थोड़ा ज्यादा डिफिकल्ट होता है, इसलिए ट्विंस प्रेगनेंसी के सिम्टम्स भी थोड़े अलग होते हैं। आइए जानते हैं ट्विंस प्रेगनेंसी के सिम्टम्स के बारे में थोड़े विस्तार से –

1 मॉर्निंग सिकनेस – ट्विंस प्रेगनेंसी के स्थिति में आपको काफी ज्यादा मॉर्निंग सिकनेस महसूस होता है। इस दौरान बहुत ज्यादा चक्कर आने और वोमेटिंग जैसी समस्या होती है।

2. वजन काफी ज्यादा बढ़ जाना – ट्विंस प्रेगनेंसी की अवस्था में गर्भ में दो भ्रूण के साथ दो प्लेसेंटा और बहुत ज्यादा मात्रा में एमनियोटिक फ्लूट होता है जिसके कारण गर्भवती का  वजन अचानक से बढ़ने लगता है।

3. भूख का बढ़ना – प्रेगनेंसी में हमेशा महिलाओं को कुछ खाने की इच्छा होती रहती है, क्योंकि उनके द्वारा खाए गए भोजन से भ्रूण को पोषक तत्व और एनर्जी मिलती है। ट्विंस प्रेगनेंसी की स्थिति में यह चीज दुगनी हो जाती है, इसलिए ट्विंस प्रेगनेंसी वाली महिलाओं को भूख ज्यादा लगती है।

4. बड़ा बेबी बंप – कई बार शुरुआती तीन महीने के बाद ही बेबी बंप बड़ा लगने लगता है। यह भी ट्विंस प्रेगनेंसी का संकेत हो सकता है, हालांकि यह महिला के कद और वजन पर निर्भर करता है।

5. समय पूर्व डिलीवरी – प्रेगनेंसी में महिलाओं का शरीर बच्चों का वेट ज्यादा सहन नहीं कर पाता है और इसलिए 36 से 37 वीक मे ही डिलीवरी की संभावना हो जाती है।

 ट्विंस प्रेगनेंसी में सप्ताह दर सप्ताह विकास | Twins  pregnancy week by week growth 

 ट्विंस प्रेगनेंसी की अच्छी ग्रोथ के लिए आपको ट्विंस प्रेगनेंसी डाइट पर विशेष ध्यान देना चाहिए।  इस लेख में आगे हम आपके लिए ट्विन्स  प्रेगनेंसी डाइट  पर भी चर्चा करेंगे, लेकिन उससे पहले ट्विंस प्रेगनेंसी के वीक बाय वीक ग्रोथ के बारे में जान लेते हैं।

 ट्विन्स प्रेगनेंसी पहली तिमाही | Twins pregnancy first trimester 

      ट्विन्स प्रेगनेंसी के पहले तिमाही में के दौरान भ्रूण का वीक बाय वीक होने वाले बदलाव व विकास को इस प्रकार जाने –

 1 से 3 वीक –

     ट्विन्स प्रेगनेंसी के पहले तीन हफ्तों के दौरान एग और स्पर्म के फर्टिलाइजेशन के बाद प्रत्येक भ्रूण अपना अलग प्लेसेंटा,  मेंब्रेन्स और एमनियोटिक सैक / थैलियां में विकसित होने लगते है।

4 से 7 वीक –

    चौथे वीक में भ्रूण की तंत्रिका ट्यूब बनती है,  जिसके बाद मस्तिष्क, रीड की हड्डी और नसों का विकास शुरू हो जाता है। इस दौरान भ्रूण का ह्रदय विकास भी होने लगता है। 

8 से 12 वीक –

    8वें वीक में आने तक ट्विंस बेबी के सभी प्रमुख अंगों का विकास होने लगता है। अब उनके दिल की धड़कन को आसानी से सुना जा सकता है,  जो 150/ मिनट की दर से धड़कता है। इसलिए डॉक्टर भी 8 वें सप्ताह में दोबारा अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं। 11 वीक आते-आते उनके हाथों का कलाई मुड़ने लगता है और पैरों की उंगलियां का अलग होना भी दिखाई देने लगता है।

 ट्विन्स प्रेग्नेंसी दूसरी तिमाही | Twins pregnancy second trimester 

       लगभग 12 हफ्ते पूरा होने के बाद ट्विन्स प्रेगनेंसी का फर्स्ट ट्राइमेस्टर खत्म हो जाता है और सेकंड ट्राइमेस्टर शुरू हो जाता है।

13 से 16 वीक –

      यह गर्भावस्था के तीसरे महीने का अंतिम या चौथे महीने के शुरुआत का दौर होता है। इसमें भ्रूण के उंगलियों में फिंगरप्रिंट बनने लगते हैं। किडनी भी विकसित होकर पेशाब बनाने लगती है। शिशुओं के पेशाब से ही अधिकांश एमीनोयोटिक द्रव बनता है,  जिसे कभी कभार शिशु निगल लेते हैं।

17 से 20 वीक –

     सिर की त्वचा पर बाल आने लगते हैं। त्वचा पर भी नई परत बनने लगती है। त्वचा की ये नई परत एमनियोटिक द्रव से शिशु का बचाव करती है। इस दौरान यानि 5वें माह के अंतिम सप्ताह में महिलाएं अपने बच्चों से बात करना महसूस करती हैं।

21 से 24 वीक –

    अब शिशु की नन्ही भौहें का विकास होने लगता है। दांतो के लिए मसूड़े बनने लगते हैं और त्वचा थोड़ी खींची खींची दिखाई देती है।

 ट्विंस प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही | Twins pregnancy third trimester 

        24 हफ्तों के ट्विन्स प्रेगनेंसी के सुनहरे सफर को तय करने के बाद 6वें महीने यानि गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में आपने कदम रख लिया है, तो अब आप अपने जुड़वा बच्चों से ज्यादा दूर नहीं है।

25 से 28 वीक –

      आपके ट्विंस बेबी के पलकों पर बाल आने लगते हैं। शिशुयें पलकों को खोल और बंद भी कर सकते है।उनकी मांसपेशियों के परते बन रही होती है। अब वो उंगली या अंगूठा भी मुंह में डालने लगते हैं। अब आप  उनके मूवमेंट का अनुभव करने लगते हैं।

29 से 32 वीक –

      इस दौरान शिशुओं के हाथों और पैरों की उंगलियों में नाखून बनने लगते हैं और उनके हाथ पैर व शरीर भरने लगता है। कई शिशु के घने बाल आ जाते हैं।

33 से 36 वीक –

     33 सप्ताह से लेकर 36 सप्ताह तक जुड़वा बच्चों का पूर्ण रूप से विकास हो जाता है। अंतिम सप्ताह केवल उनके वजन को बढ़ाने के लिए चर्बी बनने और फेफड़ों के विकास के लिए होता हैं। देखा गया है कि ट्विंस बेबी अक्सर 36 माह के अंदर यह पैदा हो जाते हैं। बहुत ही कम स्थिति में जुड़वा बच्चे 37 वीक में जन्म लेते हैं।

 ट्विंस प्रेगनेंसी में संभावित खतरा | Twins pregnancy risks 

      ट्विंस प्रेगनेंसी कभी-कभी मां और बच्चे दोनों के लिए रिस्क के साथ हो सकती है, लेकिन बेहतरीन ट्विंस प्रेगनेंसी डाइट को लेकर इस प्रॉब्लम को कम किया जा सकता है। अगर आप ट्विंस प्रेगनेंसी करने की सोच रहे हैं, तो कंसीव करने के पहले ट्विंस प्रेगनेंसी को अच्छे से समझ ले। ( आईवीएफ के दौरान आप अपनी मर्जी से ट्विंस प्रेगनेंसी  ले सकते हैं। ) ट्विंस प्रेगनेंसी कब और क्या-क्या है विस्तार से जाने :

 मां के लिए रिस्क –

 ट्विंस प्रेगनेंसी ना केवल होने वाले बच्चे के लिए, बल्कि मां के लिए भी काफी रिक्स वाला हो सकता है।

 1. हाई ब्लड प्रेशर – ट्विंस प्रेगनेंसी में अधिकतर महिलाओं को हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत होती है। सामान्य प्रेगनेंसी की अपेक्षा इसमें हाई ब्लड प्रेशर दुगुने स्तर से बढ़ता है। अगर हाई ब्लड प्रेशर की स्थिति बनी रहे, तो बच्चे के अच्छे विकास नहीं होने या मृत पैदा होने की कंडीशन के साथ-साथ महिला की जान जाने का भी खतरा हो सकता है।

2. प्रीक्लैम्पसिया – यह एक ऐसी स्थिति है जब हाई ब्लड प्रेशर और प्रोटीन यूरिन में एक साथ होते हैं। इसके कारण स्वेलिंग, हेडेक और अचानक वजन बढ़ने के समस्या होने लगती है

 3. प्रेगनेंसी डायबिटीज – अधिकतर ट्विंस प्रेगनेंसी में महिलाओं को पहले से डायबिटीज नहीं होती है, लेकिन ट्विंस प्रेगनेंसी के दौरान उन्हें ब्लड शुगर को संतुलित बनाने रखने में परेशानी होने लगती है।  इस कारण वो प्रेगनेंसी डायबिटीज का शिकार हो जाती है।

      ( ट्विंस प्रेगनेंसी के दौरान आमतौर पर व्यवस्थित दिनचर्या और ट्विंस प्रेगनेंसी डाइट को सही तरीके से लेने पर प्रेगनेंसी डायबिटीज का इलाज किया जा सकता है। कभी-कभी दवाई भी लेनी पड़ सकती है।

   4.  हाईपरमेसिस ग्रेवीडरम – यह  एक ऐसी स्थिति है,  जब ज्यादा मॉर्निंग सिकनेस से मां के शरीर के वजन में  5% से ज्यादा की कमी हो जाती है और उन्हें एडमिट करना पड़ता है। ट्विंस प्रेगनेंसी में मॉर्निंग सिकनेस बहुत ज्यादा होती है।

    5. समय पूर्व डिलीवरी – प्रेगनेंसी में कभी-कभी समय से पहले डिलीवरी की संभावना हो जाती है। समय के पूर्व डिलीवरी होने से बच्चों के फेफड़े अच्छे से विकसित नहीं हो पाते हैं, इसलिए समय पूर्व डिलीवरी को रोकने के लिए डॉक्टर दवा देते हैं, जो कभी-कभी साइड इफेक्ट भी कर देता हैं।

     6. सिजेरियन के संभावना अधिक – जब पेट में दोनों बच्चों की स्थिति सही नहीं हो यानि कि जब पहला बच्चा का सिर नीचे ना हो,  तब ऐसी स्थिति में सिजेरियन सेक्शन करना पड़ता है। ट्विंस प्रेगनेंसी में अधिकतर ऐसा होता है।

    7.  डिप्रेशन – ट्विंस प्रेगनेंसी वाली महिलाऐं प्रसव के बाद डिप्रेशन की शिकार हो जाती है।

 शिशु के लिए रिस्क 

     1. मिसकैरेज का डर – ट्विंस प्रेगनेंसी में मिसकैरेज की संभावना अधिक होती है। कुछ मामलों में ऐसा भी होता है ज़ब दोनों शिशु में से कोई एक को ही बचा पाना संभव होता है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि ज़ब एक शिशु का विकास दूसरे शिशु की तुलना में बहुत धीमी गति से होता है।

      2. पीलिया होने की संभावना –  बच्चों को ट्विन्स प्रेगनेंसी  में डिलीवरी के बाद पीलिया होने की संभावना अधिक होती है।

      हालांकि ट्विन्स प्रेगनेंसी से जुड़े सारे रिस्क बच्चे के साथ भी जुड़ा हुआ है, मां को होने वाली प्रॉब्लम का सीधा असर बच्चों पर पड़ता है।

ट्विन्स प्रेगनेंसी में रखी जाने वाली सावधानियां | Twins pregnancy precaution 

      ट्विन्स प्रेगनेंसी में होने वाले रिस्क को कम करने के लिए कई सावधानियां बरतने की जरूरत होती है। अब ट्विन्स प्रेगनेंसी प्रिकॉशन के बारे में जानते हैं –

  • थोड़ा ज्यादा भी भारी वजन ना उठाएं – ट्विन्स प्रेगनेंसी में महिलाओं को भारी वजन उठाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे उनके पेट पर दबाव पर बनता है,  जिससे गर्भाशय में दर्द हो सकता है। ऐसी स्थिति में शिशु का समय से पहले नीचे आने की संभावना बढ़ जाती है तब ब्लीडिंग हो सकती है और कभी-कभी मिसकैरेज भी हो सकता है।
  • सही ट्विंस प्रेगनेंसी डाइट को ले- अपने ट्विंस प्रेगनेंसी के दौरान ध्यान रखें,  कि आपके द्वारा लिए जाने वाला आहार पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व से भरा होना चाहिए। इस दौरान लिया जाने वाला स्वस्थ आहार ही महिला के स्वस्थ रखने के साथ-साथ में अजन्मे दोनों  को भी स्वस्थ रखता है।
  • सेक्स करते समय सावधानी रखें – ट्विन्स प्रेगनेंसी के दौरान सेक्स करने की इच्छा हो तो अपने डॉक्टर से सलाह ले ले।  ट्विंस प्रेगनेंसी  में गर्भाशय का आकार बढ़ जाता है और सेक्स के दौरान गर्भाशय से टकराने पर शिशुओं को खतरा हो सकता है। सेक्स पोजीशन को ध्यान में रखें या तो आखिरी 6 महीनों में सेक्स को अवॉयड करें।
  • किसी तरह का खिंचाव वाला काम ना करें – ट्विन्स प्रेगनेंसी महिला को ध्यान देना चाहिए कि वो कोई ऐसा काम ना करें, जिससे उनके पेट पर खिंचाव महसूस हो। ऐसा करने से पेट पर किसी तरह का दबाव से परेशानी हो सकती है। पैरों पर शरीर का पूरा रख कर भी ज्यादा देर तक नहीं बैठना चाहिए , इसे पेट में खिंचाव होता है।
  • समय समय पर डॉक्टर से कराते रहे जांच – ट्विन्स प्रेगनेंसी में सिजेरियन के चांसेस ज्यादा होते हैं, बहुत कम स्थिति में नार्मल डिलीवरी होती है। अपने बच्चों की स्थिति को जानने और कॉम्प्लिकेशन को समझने के लिए नियमित रूप से डॉक्टर से सलाह लेते रहें।

 ट्विन्स प्रेगनेंसी का संतुलित आहार | Twins pregnancy diet 

      अगर आपने ट्विंस प्रेगनेंसी कंसीव की है, तो आपको काफी हेल्दी और संतुलित आहार की आवश्यकता है। पोषक तत्वों से भरपूर ट्विन्स प्रेगनेंसी डाइट आपके और आपके अजन्मे बच्चे को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है।

       यहां हम प्रेगनेंसी डाइट का मतलब ज्यादा खाने की बात नहीं करें बल्कि हम यह कहना चाहते हैं कि ट्विंस प्रेगनेंसी के दौरान आप अपने भूख के अनुसार ही खाएं लेकिन ज्यादा से ज्यादा पोषण से भरपूर भोजन ही ले।

ट्विन्स प्रेगनेंसी डाइट के बारे में विस्तार से –

1. अधिक प्रोटीन का सेवन करें –

     प्रोटीन युक्त भोजन का अत्यधिक सेवन करें। प्रोटीन के अच्छे स्रोत के लिए आप नट्स,दही, दूध, पनीर आदि का सेवन करके अल्टरनेट दिन के अनुसार कर सकते हैं। ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियों का सेवन करें।

प्रोटीन मानव के सेल्स (कोशिकाओं) को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है। ट्विन्स प्रेगनेंसी  शिशुओं के सेल्स ग्रोथ में यह बहुत मदद करेगा, इसलिए इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

 2.आयरन से भरपूर खाना खाए –

      गर्भवती महिलाओं में आयरन की कमी होने लगती है, इसलिए डॉक्टर हमेशा से उन्हें आयरन के दवाई देते हैं। आयरन एनीमिया और हाई ब्लड प्रेशर से बचाता है।  आयरन का अच्छा स्रोत पालक,  टमाटर, देसी अड्डा, नट्स है।

 3.कैल्शियम युक्त पदार्थों  का सेवन करें –

     ट्विन्स प्रेग्नेंसी में कैल्शियम की शरीर में बहुत ज्यादा जरूरत होती है, क्योंकि यह दो बेबी के हड्डियों को निर्माण करने के साथ मां के हड्डियों को भी मजबूत रखता है, इसलिए कैल्शियमयुक्त भोजन के रूप में दूध, दही, पालक, केला को शामिल करें।

4. कार्बोहाइड्रेट भी डेली डाइट में शामिल करें –

     कार्बोहाइड्रेट का सेवन ज्यादा मात्रा में नहीं करना है,  इसे केवल संतुलित आहार के तौर पर लेना है। यदि आप चावल को रोजाना लेते हैं, तो भी काफी है। इसके अलावा ब्रेड, पास्ता और आलू को भी कभी कभार ले सकते हैं, क्योंकि ये शरीर में उर्जा ग्रोथ में मदद करता है।

 5.फोलिक एसिड युक्त आहार ले –

     हर गर्भवती महिला को डॉक्टर शुरुआती 3 से 6 माह तक फोलिक एसिड युक्त आहार और टैबलेट देने की सलाह देते हैं,क्योंकि हेल्दी प्रेगनेंसी के लिए यह बहुत जरूरी होता है। फोलिक एसिड बच्चों के स्पाइनल कॉर्ड और ब्रेन में होने वाली समस्याओं से बचाता है। इसका सबसे अच्छा स्रोत भीगाकर खाया जाने वाला बादाम है और इसके अलावा ब्रोकली, केला  अखरोट और संतरा को भी खा सकते है।

 6.नमक मात्रा संतुलित रखें –

     नमक के अंदर सोडियम होता है ,  जो शरीर के सभी चीजों को संतुलित रखने में मदद करता है। इसमें और इनके आयोडीन उपस्थित होता है, जो आपके बच्चे के नर्वस सिस्टम और ब्रेन के विकास में सहायक होता है। सीमित मात्रा में नमक का सेवन ट्विन्स प्रेगनेंसी में  अच्छा होता है।

 7. पानी ज्यादा पिएं और पानीयुक्त फलों को खाए  –

        ट्विन्स प्रेगनेंसी में पानी की क्षमता लगभग दोगुनी हो जाती है।  बच्चे के विकास में पानी अहम भूमिका होता है, इसलिए डॉक्टर सीधे पानी नहीं पी पाने की स्थिति में उन फलों के सेवन करने के लिए कहते है, जिनमें पानी की मात्रा ज्यादा हो जैसे खीरा, तरबूज गाजर आदि।

ट्विन्स प्रेगनेंसी में लड़के या लड़कियां के जाने लक्षण | Girl or boy twins pregnancy sign 

 दोनों बेबी गर्ल हो –

     ट्विंस प्रेगनेंसी में दो बेबी गर्ल हो तो आपके फेस में बहुत ज्यादा ग्लो होने लगेगा। आपको मीठा खाने इच्छा होगी। बाल भी अचानक से सिल्की साइन होंगे, आपको लेफ्ट पैर में ज्यादा दर्द होगा।  कमर और निचले हिस्से में फैट का जमा होगा।  प्रेगनेंसी के पूरे टाइम पीरियड में अच्छी नींद नहीं आ पाएगी।

 दोनों बेबी बॉय हो –

       ट्विन्स प्रेगनेंसी में जब दोनों बेबी बॉय हो, तब दूसरी तिमाही से ही पेट का आकार बहुत बड़ा होगा। बहुत गुस्सा आना, बॉडी में जलन होना, तीखा चटपटा खाने का इच्छा होना, चेहरे पर पिंपल्स या दाने का निकलना, बालों का ड्राई हो जाना, फेस और हाथ पैरों पैरों की स्किन ड्राई होना, पैरों में पहले की तुलना में ज्यादा बाल आना आदि दो बेबी बॉय के लक्षण है।

 गर्ल और बॉय हो –

     ट्विंस प्रेगनेंसी में अगर आपके साथ गर्ल और बॉय दोनों हो, तब आपको गर्ल और बॉय दोनों टाइप की फीलिंग महसूस होगी। जो कभी कभार बदलते रहेगी।

 कुछ जरूरी सवाल

अगर ट्विन्स प्रेगनेंसी में एक बच्चे की ग्रोथ 7 महीने में रुक जाती है, तो क्या वापस ग्रोथ शुरू हो सकती है ?

ट्विन्स प्रेगनेंसी के छठवें और सातवें वीक में अल्ट्रासाउंड जरूर करना चाहिए, क्योंकि इस दौरान ही बच्चे के सही स्थिति का पता चल पाता है। सातवें वीक में दोनों बच्चों के ग्रोथ के सही स्थिति के बारे में डॉक्टर ही आपको सही सलाह दे सकेंगे।

       हालांकि दोनों के बीच ग्रोथ में ज्यादा अंतर नहीं है, तो कुछ संतुलित आहार और डॉक्टर के सलाह अनुसार दवा लेने से पुनः ग्रोथ संभव हो सकता है।


वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम क्या होता है ?

 कभी-कभी गर्भ में दोनों शिशुओं में से एक का विकास सही तरीके से नहीं होने के कारण एक शिशु की मृत्यु हो जाती है, तो इसे वैनिशिंग ट्विन सिंड्रोम कहते है।

 ट्विन्स प्रेगनेंसी में 56 दिन में एचसीजी लेवल क्या होता है ?

 जैसे गर्भावस्था का समय बढ़ता है, वैसे ही एचसीजी लेवल  कम होता जाता है। ट्विन्स प्रेगनेंसी में 56 दिन यानी फर्स्ट ट्राइमेस्टर के दूसरा महीना के आखिरी सप्ताह में एचसीजी लेवल 9000 से 210000 यू /एल होता है।

 ट्विन्स प्रेगनेंसी में मुनक्का डाख के नुकसान और बेनिफिट क्या है ?

 ट्विन्स प्रेगनेंसी मुनक्का खाने से कैल्शियम और आयरन की कमी को पूरी होती है। इसके सेवन के पूर्व डॉक्टर से इसकी मात्रा के लिए सलाह लेनी चाहिए, क्योंकि अत्यधिक सेवन से कैलोरी बढ़ती है और गर्भवती में डायबिटीज की समस्या भी हो सकती है।

ट्विन्स प्रेगनेंसी में एक प्लेसेंटा एक ही अंबिलिकल (Umbilical) कॉर्ड है, तो उन्हें रिस्क कितना हो सकता है ?

   प्लेसेंटा = जिसके अंदर बच्चे का पोषण होता है।

       अंबिलिकल कॉर्ड = महिला के नाभि से जुड़ी शिशुनाल होती हैं।

एक प्लेसेंटा एक ही अंबिलिकल (Umbilical) कॉर्ड है, तो उन्हें हाई रिस्क हो सकता है,  क्योंकि ऐसी संभावना ना के बराबर होती है।

     प्रत्येक शिशु के लिए अपना एक अलग अंबिलिकल कॉर्ड होता है,  लेकिन एक प्लेसेंटा के अंदर दो एमियोटिक फ्लूड की थैली में दो शिशु का विकास होता है, तो एक प्लेसेंटा की स्थिति में भी रिस्क थोड़ा बढ़ जाता है।

        तो दोस्तों, आज के इस “कुछ सीखें” लेख में हमने आपके साथ ट्विंस प्रेगनेंसी डाइट के साथ ट्विंस प्रेगनेंसी से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारी शेयर की है। यदि अब भी ट्विन्स प्रेगनेंसी को लेकर कोई डाउट आपके मन में है, तो आप कमेंट बॉक्स में अपने सवाल हमसे जरूर शेयर करें। 

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1 Comment

हेल्थ सिस्टम क्या है ? - कुछ सीखे · 07/08/2022 at 2:33 pm

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