मानव शरीर मे पथरी की समस्या बहुत ज्यादा बढ़ने लगी है। आजकल लोग शरीर के विभिन्न भागों जैसे कि किडनी , पेट (स्टमक) और पित्त की थैली आदि में पथरी की समस्या से जूझ रहे है। इस आर्टिकल में हम आपको पित्त की थैली मे पथरी का इलाज कैसे करें , से संबंधित जानकारी साझा करेंगें।  यदि आपको भी पथरी की समस्या का अंदेशा हो रहा है, तो आप इसे हल्के में ना ले । समय रहते पथरी का सही इलाज नही होने से आपको ऑपरेशन भी कराना पड़ सकता है। इस लेख में आगे हम आपको पित्त की थैली में बनने वाली पथरी से जुड़ी सारे विषयों पर चर्चा करेंगे। साथ ही पथरी से संबंधी अन्य जरूरी जानकारी भी आपको उपलब्ध कराएंगे । 

तो आइए जानते है, विस्तार से – 

पित्त की थैली क्या है

इसे पित्त की थैली या पित्ताशय की थैली कहा जाता है। अंग्रेजी में इसे गॉल ब्लाडर के नाम से जाना जाता है। पित्त की थैली का चित्र विवरण देखे तो यह आकार में एक छोटे नाशपाती के जैसे होता है, जो यकृत (लिवर) के नीचे पायी जाती है। यह  तरल पदार्थ , जो लिवर में बनता है, उसे  संग्रहीत करने का काम करता है, जिसे पित्त(बाइल) कहा जाता है। साथ ही यह शरीर के वसा (फैट) को तोड़ने का भी काम करता है। 

        जब हम भोजन करते हैं, तो  तो ये पित्ताशय भोजन के फैट के लिये पित्त नली को खाली कर देता है। ये पित्त नली पाचन प्रकिया को नियमित रखने के लिये पित्त (बाइल) को  छोटी आंत में ले जाती है।

पित्त की थैली में कितने प्रकार की बीमारी पायी जाती है

कोलेस्ट्रॉल और जंक फूड की अधिक मात्रा में सेवन करने से कभी कभी पित्ताशय/पित्त की थैली (गॉल ब्लाडर) से भोजन को छोटी आंत तक जाने वाले मार्ग अवरुद्ध हो जाते है। इस स्थिति को तीव्र कोलेसिस्टिटिस कहा जाता है। जिसके कारण  कोलेस्ट्रोल का जमाव गॉल ब्लाडर में होने लगता है। जो धीरे-धीरे कठोर होकर पित्ताशय के अंदर पत्थर (स्टोन) का रूप ले लेती है। 

        जब पित्ताशय की थैली में बन रहे स्टोन मवाद से फूल जाती है। मवाद यानी कि “सफेद रक्त कोशिकाओं, मृत ऊतक और बैक्टीरिया का संचय” । इस दौरान कभी कभी गॉल ब्लाडर में सूजन और फोड़ा होने का परिणाम देखा जा सकता है । 

       इसके अलावा गॉल ब्लाडर में गड़बड़ी की वजह से कई बार बाइल जूस आंतों तक ना पहुँच कर बाइल डक्ट में ही जमा होने लगता है, इससे लोगों को पीलिया (जॉन्डिस) भी हो सकता है। साथ मे पेट , पीठ और दाहिने कंधे पर बहुत ज्यादा दर्द महसूस होता है।

       और यदि आंतों में जाने के बजाय बाइल जूस पैनक्रियाज़ में जाकर एकत्र हो जाए,  तो इससे क्रॉनिक पैनक्रिएटाइटिस नामक गंभीर समस्या झेलनी पर सकती है। अगर समय रहते पथरी को गंभीरता से ना लेकर उपचार कराया जाए , तो इससे पित्त की थैली में कैंसर भी होने की संभावना भी होती है।

पित्त की थैली में पथरी होने के लक्षण 

आमतौर पर, ऐसा देखा है कि पित्ताशय/पित्त की थैली में पथरी होने के लक्षणों का पता तुरंत नहीं चल पाता है। कभी कभी जब 1 से 2 साल बाद इसके लक्षण शुरू होते है , तब तक स्टोन काफी बड़े रूप में विकसित हो जाता है। शुरूआत में इनका आकार बहुत कम होने के कारण रोगी को किसी तरह की असुविधा महसूस नहीं होती है,इसलिए  इसके लक्षण पर रोगी का ध्यान नही जाता है। 

       लेकिन, यदि समय रहते स्वास्थ्य संबंधी छोटी छोटी समस्या पर ध्यान दिया जाए, तो पित्त के थैली में पथरी बनने के शुरुआती लक्षण का पता लगाया जा सकता है। 

हालाँकि इसके बावजूद कुछ ऐसे लक्षण है, जिसका पता लगते ही पित्त के थैली के पथरी का इलाज किया जा सकता है, निम्नानुसार है – 

1. पेट मे नियमित तौर पर दर्द का बने रहना ।

2.पेट के राइट साइड के ऊपरी हिस्से में अचानक से असहनीय दर्द का बार बार होना ।

3.पीलिया के लक्षण दिखाई देने के साथ साथ पेट मे दर्द होना ।

4.अपच और खट्टा डकार आना ।

5.नियमित रूप से उल्टी और मितली की समस्या होना।

6.कमजोरी महसूस होना। 

7. भूख में कमी और दस्त की समस्या ।

         यदि पित्त की थैली में पथरी हो तो उपरोक्त लक्षण के अतिरिक्त निरंतर बुखार आने की समस्या भी बनी रहती है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से सलाह लेकर सोनोग्राफी करा लें।

पित्त की थैली में पथरी का होम्योपैथिक में पक्का इलाज 

यदि समय रहते पित्ताशय के पथरी का पता लग जाये , तो इसका निदान बिना ऑपेरशन के बिना भी किया जा सकता है। पित्त की थैली के पथरी का इलाज कैसे करे , अगर ये सवाल आपके मन को परेशान कर रहे है , तो चिंता मत कीजिये। हम आपको पित्त के थैली में पथरी का पक्का होम्योपैथिक इलाज बता रहे है –

1. बैप्टिसिया टिंक्टरिया – इसे वाइल्ड इंडिगो भी कहा जाता है। इसे पेट के दाईं ओर दर्द, पित्ताशय के आसपास घाव, दस्‍त, लीवर के आसपास घाव और दर्द जैसे लक्षणों के इलाज में उपयोग किया जाता है।

2.बर्बेरिस वुल्गैरिस – इसे बर्बेरी भी कहा जाता है। पित्त रस के स्राव के लक्षणों में इस दवा का उपयोग किया जाता है। साथ ही पित्ताशय के आसपास के भाग में टाँके लगने जैसा दर्द महसूस होना  और  लिवर के  पास वाले  भाग में दर्द होना , जो बढ़ कर  पेट की  ओर  जाता है। और इस दर्द का पेट की ओर बढ़ना। पीलिया की स्थिति में इस दवा का उपयोग होता है।

3.ब्रायोनिया अल्बा– इसे पेट के आसपास के हिस्से में दर्द के साथ जलन महसूस होने की स्थिति लिया जाता है। ये दर्द कब्‍ज के साथ सुबह के समय सुबह के समय , गर्म मौसम और थकान होने पर बढ़ जाता है।

4.कार्डअस मारियेन्स – इसे सेंट मेरी थिसल नाम से भी जाना जाता है। इसे पीलिया, लिवर में दर्द, कभी कब्ज और कभी दस्त की स्थिति होने पर और पित्ताशय में दर्द और सूजन होने पर   लिया  जाता है।

5. कैलकेरिया कार्बोनियाइसका उपयोग पेट पर आसानी से दबाव महसूस होना, लीवर में हल्के दबाव के साथ दर्द होना। पेट के राइट साइड में पथरी का दर्द तेज होना।

6.चेलिडोनियम मेजस – इसे स्लैनडाइन भी कहते है। इसे पीलिया और लीवर से जुड़ी बीमारियों जैसे पित्ताशय में तेज दर्द , पित्ताशय और लीवर के आसपास सूजन की स्थिति होती है। दर्द सुबह और रात में बढ़ जाता है।

7. कॉलेस्टेरिनम/कॉलेस्टेराइन- पेट के आसपास जलन के साथ तेज दर्द, पीलिया और पित्ताशय में पथरी के कारण दर्द के इलाज में इस दवा को दिया जाता है।

8. फेल टौरी – इसे ऑक्स गॉल कहा जाता है।  पित्त नलिका में रुकावट आने के वजह से तेज दर्द, पथरी के कारण पीलिया और दस्‍त जैसे लक्षणों का इलाज में  इस दवा को दिया जाता है।

9.टीलीया ट्रीफॉलीऐटा – इसे वेफर ऐश भी कहा जाता है। इस दवा का इस्तेमाल पित्त की थैली में स्टोन होने से लीवर से जुड़ीं समस्या, पेट के दाईं ओर दर्द,पेट के दाईं ओर लेटने पर दर्द कम होता है। पित्ताशय के सूजन में भी ये दवा राहत देता है।

पित्त की थैली मे पथरी का इलाज कैसे करे

पित्त की थैली का ऑपरेशन  के खर्च और ऑपरेशन के बाद की सावधानी  

 पित्ताशय की थैली में पथरी होने पर इसके प्रारंभिक इलाज मे होमियोपैथी और आयुर्वेदिक दवा को अच्छा माना गया है। लेकिन यदि गॉल ब्लाडर में स्टोन 3 सेंटीमीटर से ज्यादा या काफी ज्यादा बड़ा हो गया हो। साथ ही पेट का दर्द असहनीय हो जाये या फिर पित्त की थैली में बने स्टोन एक से दो बार होमियोपैथी और आयुर्वेदिक दवा से गल जाने के बाद भी नया स्टोन बार-बार फिर से बनते जाए। तो इस स्थिति में पित्ताशय की थैली को ऑपरेशन से निकालने की सलाह दी जाती है।

          पित्ताशय की थैली के ऑपरेशन में ज्यादा खर्च नही होता है। सामान्यतः इसमें 15 से 25 हज़ार तक खर्च हो सकते है।

          पित्त के थैली के ऑपरेशन के बाद पित्त की थैली के पथरी का इलाज कैसे करे , इसका समाधान तो मिल जाये, लेकिन अपनी नियमित  खानपान में बहुत सावधानी बरतने की जरूरत होती है, आइये जानते है , इसके बारे में 

        ऑपरेशन के बाद जब तक शरीर पित्ताशय के बिना रहने के लिये एडजस्ट नहीं हो पाती  है , तब तक अत्यधिक वसा (फैट्स) वाले चीज़ें जैसे तली हुई चीजें , मीट , डेयरी उत्पाद  जैसे बटर, चीज, आइस क्रीम, क्रीम, दूध  पिज्जा,घी या बटर से बने हुए उत्पाद नही लेना चाहिये । साथ ही साथ हाई फाइबर वाले प्रोडक्ट जैसे कि ब्रेड,बादाम ,किसी भी प्रकार के बीज,फलियां,अंकुर,ब्रॉक्ली,पत्ता गोभी,फूल गोभी आदि का सेवन बहुत ही कम मात्रा में करना चाहिये । मसाले दार खाने के सेवन से भी बचे।

          ध्यान देवे कि एक बार मे बहुत अधिक  खाने के बजाय थोड़ी थोड़ी मात्रा में कई बार खाये, क्योकि शरीर पहले की तरह खाना नहीं पचा पायेगा। तरल पदार्थ सेवन उपयुक्त है।

पित्त की थैली फटने से होने वाले नुकसान

पित्ताशय की थैली के पथरी को हल्के में लेना जानलेवा हो सकता है।  कई बार पथरी आकार में काफी बड़ा रूप ले लेता है। जिसके कारण पित्त की थैली में सूजन आ जाती है और ये सूजन लगातार बढ़ने से पित्त की थैली फटने की पूरी संभावना होती है। 

        थैली फटने से पथरी निकलकर बाइल डक्ट में भी फंस सकती है। साथ ही शरीर अन्य मार्ग को भी अवरुद्ध कर सकती है। जिसके परिणाम स्वरूप आँतो/इंटेस्टाइन का कार्य प्रभावित होता है और पाचन क्रिया प्रभावित होती है। यदि समय रहते गॉल ब्लाडर का ऑपरेशन कर पथरी और फटी थैली को बाहर नही निकाला गया , तो कैंसर और मौत का सामना करना पड़ सकता है। 

पित्त की थैली का ऑपरेशन में निकल जाती है, तो खाना कैसे पचता है


शरीर के पाचनतंत्र का महत्त्वपूर्ण अंग है , पित्ताशय की थैली। इसलिए ऑपरेशन के बाद इसके हटाये जाने पर अक्सर लोगो को खाना कैसे पचेगा, इसकी चिंता होती है। सामन्यतः यह लिवर से आने वाले बाइल जूस (पाचक रस) को एकत्रित करती है, लेकिन सर्जरी के बाद लिवर से निकलने वाला बाइल जूस सीधे तौर पर छोटी आंतों में चला जाता है।

         इससे लिवर व आंतो के बीच की प्रक्रिया में ऑपरेशन के बाद कुछ समय तक के लिये दिक्कत आ सकती है, क्योंकि गॉल ब्लाडर के बिना कम मात्रा में लिये गया वसा को शरीर द्वारा पचाना आसान होता है। जबकि बड़ी मात्रा में वसा आसानी से नही पच पाता है,जिससे  गैस, पेट फूलना और दस्त (डायरिया) आदि समस्याओं को झेलना पड़ सकता है। 

         हालाँकि ये समस्या बहुत लंबे समय तक नही रहती है। चिकित्सक के सलाह अनुसार डाइट फ़ॉलो करने पर शरीर बिना पित्ताशय की थैली की भी खाना पचाने का काम अच्छी तरह करने लगती है।  

क्या पित्ताशय की थैली हटाने के बाद वजन बढ़ाना संभव है

हाँ , पित्त की थैली को ऑपरेशन के बाद हटाने से वजन बढ़ने की शिकायत देखी गई है। एक बार शरीर गॉल ब्लाडर के बिना काम करने लगता हैं , तो चिकित्सक सलाह के डाइट चार्ट को फॉलो करना मुश्किल हो जाता है। जिसके बाद लोग पुनः वसायुक्त और हाई फाइबर वाले भोजन को अपने रूटीन में शामिल कर लेते है।जिससे शरीर की चयापचय क्रिया सही से नही हो पाती है, परिणाम स्वरूप वजन बढ़ता है। 

पित्त की थैली चीरे वाले ऑपरेशन से होने के बाद जिम जा सकते है

गॉल ब्लाडर सर्जरी के बाद पहले दो हफ्तों के लिए किसी भी प्रकार  के ज़ोरदार शारीरिक गतिविधि से बचने का पूरा प्रयास करना चाहिये। यहाँ तक पहले सप्ताह में गाड़ी ड्राइव करना भी अवॉइड करे।डॉक्टर पित्त की थैली के चीरे वाले ऑपरेशन के बाद ठीक होने के लिये आराम करने की  सलाह देते है। 

         आप व्यायाम करना चाहते है, तो फ़िलहाल कुछ समय के लिए कम दूरी तक चलना, स्विमिंग या योगा शुरू कर सकते है। आम तौर पर डॉक्टर कम से कम 6 सप्ताह के लिए 5 पाउंड (2.3 किलोग्राम) से अधिक भारी उठाने से मना करते है। इसलिये ऑपरेशन के बाद 3 से 4 महीने तक आपको जिम जाने के बारे में नही सोचना चाहिये ।

पित्ताशय की थैली निकालने के बाद शराब पीना चाहिए

 शराब पीने की आदत भी सर्जरी के दौरान और बाद में शरीर प्रभावित कर सकती है।  यदि  नियमित रूप से शराब पीते हैं, तो ऑपरेशन के दौरान और बाद में कई परेशानी हो सकती है, जिसमे रक्तस्राव, संक्रमण, हृदय की समस्याएं और लंबे समय तक अस्पताल में रहना शामिल हो सकता है। इसलिये डॉक्टर पित्ताशय की थैली निकालने के बाद शराब नही पीने की ही सलाह देते है। 

पित्त की थैली में ऑपरेशन के बाद गर्भाधारण

पित्त की थैली में ऑपरेशन के बाद कम से कम एक साल तक गर्भधारण के बारे में नही सोचना चाहिये। एक साल के बाद गर्भधारण किया जा सकता है, ऐसी स्थिति में  खान पान का विशेष ध्यान रखे। ज्यादा कोलेस्ट्रॉल और फाइबर युक्त खाने से बचे अन्यथा आपको अपच, उल्टी और बुखार जैसे समस्या हो सकती है। 

      कभी कभी गर्भावस्था के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन बहुत ज्यादा मात्रा में विकसित होने के कारण शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल को बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। जिसकी वजह से गॉल ब्लाडर में स्टोन बनने लगते हैं , इसे प्रेग्नेंसी के 2 से 6 महीने के बीच ऑपरेशन से निकालना सही होता है।

दोस्तों, आशा है कि इस लेख में आपको “पित्त की थैली के पथरी का इलाज कैसे करे” से जुड़ीं सभी जरूरी जानकारी मिल गई होगी । अगर अब भी आपके मन मे पित्त की थैली में बनने वाले पथरी/स्टोन से संबंधी कोई क़्वारी हो, तो आप कमेन्ट बॉक्स में बता सकते है। 

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