यदि किसी की हाइट अच्छी हो, तो उसके पर्सनैलिटी में  वो चार चांद लगा देती है। अच्छे हाइट वाले लोगों के अंदर पॉजिटिव एनर्जी और हाई कॉन्फिडेंस लेवल होता है। अच्छी ऊंचाई ना हो तो, कई जॉब मे भी करियर बना पाना संभव नहीं होता है। इसलिए कम लंबाई वाले लोगों को कई जगह पर निराशा ही हाथ लगती है।

       अपने हाइट से परेशान लोग अपनी ऊंचाई बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। कई बार तो, वो कई प्रकार के दवाइयों का भी सेवन करने लगते हैं, जो कभी-कभी उनके शरीर का साइड इफेक्ट कर देती है।

      माना जाता है कि आमतौर पर किसी व्यक्ति के लंबाई का कनेक्शन या तो फैमिली जिन्स से होता है या फिर हार्मोनल चेंजेस से और कभी-कभी अनहेल्दी डाइट या कोई  बीमारी भी लंबाई बढ़ने में बाधा बन जाते हैं। कहते हैं कि किशोरावस्था के एक उम्र के बाद हाइट बढ़ना रुक जाता है, लेकिन क्या आपको पता है योग ने इस बात को गलत साबित कर दिया है।

      योग ने मानव जीवन के हर परेशानियों का समाधान निकाला है,  तो भला व्यक्ति की लंबाई की प्रॉब्लम कैसे बची रह सकती थी। कई अध्ययनों से सिद्ध हुआ हैं कि कुछ विशेष योगासन को नियमित रूप से करने से लंबाई बढ़ने में काफी मदद मिलती है।  जी हां, अगर आज आप लंबाई बढ़ाने वाले बेहतर योगासन की तलाश में हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं।

    आज के “कुछ सीखे” के इस लेख में हम आपके लिए “ऊंचाई बढ़ाने के लिए कौन सा योगासन किया जाता है?” Which yoga exercises is better for height improvement? से जुड़ी सारी महत्वपूर्ण जानकारी लेकर आए हैं। इससे पहले कि हम हाइट बढ़ाने वाले योगासन के बात करें, उससे पहले हम योग क्या है? योग का इतिहास क्या है? योग के प्रकार संबंधित सारी जानकारी पर चर्चा कर लेते हैं, जो आपके लिए जानना काफी लाभदायक है।

      तो अपने हाइट की परेशानी को दूर करने के लिए हमारे लेख के साथ मे अंत तक बने रहें :

 योग क्या है? ( Yoga kya hai hindi me )

        योग की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द युज से हुई है,  जिसका सीधा अर्थ है अंतरात्मा से परमात्मा का जुड़ाव। योग एक आध्यात्मिक अनुशासित कला है, जो मानव मन को स्थिर करता है, जिसके नियमित रूप से अभ्यास करने से ही बेहतर परिणाम प्राप्त होता है। कहा जा सकता है कि मन और शरीर को एक दूसरे से बेहतर रूप से कनेक्ट करने के लिए योग एक बेहतरीन मार्ग है।

        योग विज्ञान का एक अंग भी है जो मानव के शारीरिक संरचना को व्यावहारिक तरीके से नियंत्रित करता है।

 योग का अर्थ क्या है? ( Yoga ka meaning hindi me )

     साधारणतः योग का अर्थ होता है जुड़ना यानी मिलन। यह शरीर, मन और आत्मा को एक साथ जोड़ने काम करता है, जिससे कि जीवात्मा और परमात्मा का एक साथ मिलन संभव हो पाता है।

 योग का उद्देश्य क्या है? (Yoga ka udeshy kya hai ) 

1. शारीरिक लाभ : शरीर से सभी रोगों का निवारण, तनाव मुक्त जीवन शैली।

2. मानसिक लाभ : मन को स्थिर कर  मानसिक शांति प्राप्त करना, मन पर नियंत्रण रखना।

3. सामाजिक लाभ : आत्मविश्वास बढ़ने से खुश रहना और सबके लिए अच्छा सोचना।

4. आध्यात्मिक लाभ: भगवान व परमात्मा से खुद का जुड़ाव महसूस करना।

5. आत्मबोध का ज्ञान : आत्म चिंतन से खुद को जान पाना। 

 योग का इतिहास क्या है? ( History of yoga)

     योग करने की क्रियाविधि का संबंध हजारों वर्ष पहले से लगाया जाता है। हालांकि लगभग 200 ईसा पूर्व में पतंजलि के सांख्य दर्शन मे इसे एकीकृत करके सही रूप से प्रस्तुत किया गया है। ध्यान भी योग का ही एक प्रकार है, इसलिए भगवान शिव को भी ध्यान मुद्रा में रहने के कारण योग विद्या का आदि योगी  या आदि गुरु के नाम से जाना जाता है।

      योग के इतिहास में 5 काल को जोड़ा गया है, आइए जानते हैं इन कालो के बारे में विस्तार से :

1. वैदिक काल  ( लगभग 1500 ई पूर्व में )

     वैदिक काल में योग का सबसे पहला उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है। फिर 1200 ई पूर्व में अथर्ववेद में मन के लिए ज्ञानेंद्रियों को नियंत्रण करने का उल्लेख मिलता है।

2. पूर्व शास्त्रीय काल  ( लगभग 1000 ई पूर्व से 500 ई पूर्व )

      इस काल में उपनिषदों का उल्लेख है। 108 उपनिषदों में से 20 उपनिषद योग से संबंधित है,जिसमें प्राणायाम, ध्यान जैसे योग मुद्रा शामिल है।

3. शास्त्रीय काल ( 500 ई पूर्व से 800 ईसवी )

      इस काल में कई विद्वानों द्वारा योग का अलग-अलग उल्लेख किया गया है। भगवान महावीर और बुद्ध ने विशिष्ट आसन और ध्यान क्रिया के बारे में बताया। भगवान कृष्ण ने अर्जुन को धर्म-कर्म और योग का ज्ञान दिया। योग पिता महर्षि पतंजलि ने इसी काल में योग को व्यवस्थित किया।

4. उत्तर शास्त्रीय काल ( 800 ई से 1700 ई )

    इस काल में शंकराचार्य और कई दार्शनिक ने योग को अपनाने पर जोर दिया। तुलसीदास सहित कई महान पुरुषों ने योग विज्ञान में अपना योगदान दिया।

5. आधुनिक काल ( 1700 ई से 1900 ई )

    आधुनिक काल में योग का प्रचलन रामकृष्ण परमहंस,  बीकेएस अयंगर, परमहंस योगानंद और विवेकानंद जैसे लोगों द्वारा किया गया। स्वामी विवेकानंद ने योग का प्रचार पश्चिमी देशों में भी किया। इसके बाद से योग की यात्रा आधुनिक जीवन शैली के साथ चलनी शुरू हो गई।

        आज के समय में कई रोगों के उपचार, शारीरिक फिटनेस और तनाव जैसी समस्याओं के निपटान के लिए योग को अपनी लाइफस्टाइल में शामिल करना स्वस्थ शरीर के लिए एक बेहतरीन निर्णय है।

      क्या आपको पता है वैदिक काल के पूर्व यानी लगभग 2700 ई पूर्व के सिंधु घाटी की सभ्यता में भी योग साधना से जुड़े कई आकृतियो के साक्ष्य मिले हैं।

 योग का महत्व और लाभ क्या है? ( Importance and benefits of yoga )

     वर्तमान दौर में योग को काफी ज्यादा महत्व दिया जा रहा है,  कारण यह है कि आधुनिक जीवनशैली कारण हमारा शरीर कम उम्र में ही गंभीर बीमारियों से ग्रसित होते जा रहा है। कई बीमारियों का साल्यूशन डॉक्टरों के पास भी उपलब्ध नहीं हो रहे हैं, इसलिए योग का प्रोत्साहन डॉक्टरों द्वारा भी किया जा रहा है, क्योंकि विज्ञान ने भी योग को स्वस्थ जीवन का परिचायक माना है।

  • योग हमारे शरीर के इम्युनिटी को बढ़ाता है, जिससे शरीर बाहरी रोगों से लड़ने में सहायक होता है।
  • योग करने से शरीर की हड्डियों में काफी लचीलापन आता है, जो शरीर को स्वस्थ बनाए रखता है।
  •  योग के नियमित अभ्यास दिमाग के सारे नकारात्मक विचार से मुक्ति पाया जा सकता है।
  • योग करने से मन के ध्यान मुद्रा में होने से वो एकाग्र होता है और मन पर कंट्रोल करना आसान होता है। 
  •  योग शरीर को अनुशासित करता है,  जिससे तनाव और डिप्रेशन जैसी स्थिति निर्मित नहीं होती है।

        ऐसे ही कई असीमित लाभों को देखते हुए योग को काफी महत्व दिया जा रहा है। भारत के जन्मे इस योग कला का विस्तार को पूरे दुनिया में हो चुका है,  जिसका प्रमाण 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर देखा जा सकता है।

 योग के प्रकार क्या है?  ( Types of yoga)

       आपने योग के विभिन्न स्वरूप के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आपको पता है योग कितने प्रकार का होता है? योग के कितने अंग है और उसकी कार्यप्रणाली क्या है? योग को मुख्य रूप से है 6 प्रकार और 3 अंग में बांटा गया है।

 1.हठयोग

2. अष्टांग योग/ राजयोग/क्रिया योग

3. कर्मयोग

4. ज्ञान योग /सांख्य योग /ब्रह्म योग

5. लय योग / कुंडलिनी योग

6. भक्ति योग

 योग के तीन अंग में आसन, प्राणायाम और ध्यान शामिल है।

 हठयोग क्या है? 

    योग मे सभी प्रकारों में से हठयोग को मुख्य माना गया है। जैसा की नाम से ही स्पष्ट है हठ यानि बल। वो योग जो अधिक शारीरिक बल से किया जाए, इस योग को करने से शरीर के सोए हुए भाग भी एक्टिव हो जाते हैं।  यह शरीर और दिमाग दोनों को बैलेंस करता है।

   इसे  7 में अंगों में बांटा गया है : षटकर्म,आसन, प्राणायाम, मुद्रा, प्रत्याहार, ध्यान, आसन और समाधि।

2. अष्टांग योग क्या है? / राजयोग क्या है? /क्रिया योग क्या हैं? 

     महर्षि पतंजलि और कई ऋषि-मुनियों ने अपने सिद्धि इसके पश्चात अष्टांग योग से लोगों को परिचय करवाया। भगवान बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग भी इस अष्टांग योग का ही हिस्सा है। इसमें आत्म शुद्धि के आसनों के बारे में बताया गया है, इससे शरीर के अंदर की नकारात्मक क्रिया जाती है और आत्मज्ञान की अनुभूति होती है। इसे राजयोग के नाम से भी जाना जाता है,  क्योंकि इससे आत्मराज का मार्ग मिलता है।

       अष्टांग योग के आठ अंग है, जिसमें यम, नियम आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि शामिल है। इसका विस्तारित रूप ही क्रियायोग है, जो शरीर और मन को अनुशासित करता है और आत्मा को परमात्मा से मिलाता है।

3. कर्म योग क्या है?

     श्री भागवत गीता के कर्म योग का महत्व सबसे बढ़कर बताया गया है। घर में योग्य व्यक्ति केवल कर्म करता है और कर्म फल की चिंता नहीं करता है। कर्मयोग में व्यक्ति की स्थिति एक दानी की तरह होती है।

      स्वामी विवेकानंद के अनुसार निजी स्वार्थ को त्याग कर अपने कर्तव्य को सत्यनिष्ठ पूरा करना ही कर्मयोग है। कर्म योग के दो भागों में बांटा गया है, सकाम कर्म – स्वयं के लाभ के लिए और निष्काम कर्म – निस्वार्थ भावना से ।

4. ज्ञान योग क्या है?/ सांख्य योग क्या है?/ ब्रह्म योग क्या है?

    ज्ञान योग में स्वयं को जानने की बात कही गई है। इसमें साधना के तहत आत्मनिरीक्षण के मार्ग पर जोर दिया गया है। इसलिए इसे सांख्य योग भी कहा जाता है। ज्ञान योग में स्वयं से मैं और मेरी आत्मा से जुड़ी सवालों से पूछकर इच्छा, अहंकार और भ्रम जैसे चीजों का त्याग किया जाता है।

      यह प्रबल दृढ़ संकल्प और इच्छा शक्ति पर आधारित  है,  इसलिए यह सबसे कठिन योगाभ्यास में से है। एक बार ज्ञान योग के माध्यम से आत्मज्ञान होने से ब्रम्ह यानि मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसलिए से ब्रह्म योग भी कहा जाता है।

5. लय योग क्या हैं? / कुंडलिनी योग क्या हैं?

    लय योग ध्यान मुद्रा का एक आसन है, जिससे मन यानि चित्त को पूर्ण रूप से ब्राह्मण की शक्ति से जोड़कर सकारात्मक ऊर्जा को अपने अंदर लिया जाता है।इससे  स्मरण शक्ति बढ़ती है। इसे कुंडलिनी योग भी कहा जाता है, क्योंकि कुंडलिनी का संबंध शरीर की निष्क्रिय शक्ति को जागृत करना है। यह शरीर के रीढ़ के आधार पर स्थित 7 कुंडलित चक्र को ध्यान के माध्यम से जागृत करता है।

     इसके 7 चक्र के नामों में मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा और सहस्त्रार  है।

6. भक्ति योग क्या है?

    भक्ति योग का मतलब ईश्वरी प्रेम से जुड़ाव। भक्ति योग करने वाला स्वयं को ईश्वर को समर्पित कर देता है और ईश्वर की सच्ची श्रद्धा से आराधना करता है। जिससे उनका मन कोमल और निर्मल हो जाता है और वो ईर्ष्या, घमंड और क्रोध जैसे चीजों से खुद को मुक्त कर पाता है। उसका जीवन आनंद और शांति से परिपूर्ण हो जाता है।

      दोस्तों,  योग से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारी तो आपको मिल गई। अब योगासन क्या है? उस पर थोड़ी चर्चा कर लेते हैं, ताकि ऊंचाई बढ़ाने वाले योगासन करने से पहले योगासन के अर्थ को अच्छे से समझ सके।

 योगासन क्या है? (Yogaasan Kya Hai )

     योगासन के नाम से ही स्पष्ट है योग और आसन। योग को समाधि माना जाता है और आसान शरीर की स्थिति होती है। योगासन को दो प्रकार से बताया गया है पहला बैठने की मुद्रा और दूसरा शारीरिक मुद्रा।

 आइए अब लेख के मुख्य टॉपिक ” ऊंचाई बढ़ाने के लिए कौन सा योगासन किया जाता है? ” ( Which yoga exercises better for height improvement ) के बारे में आपको जानकारी देते हैं।

         यहां हम से ऐसे 6 योगासन के बारे में आपको बता रहे हैं, जिन्हें सही और नियमित रूप से करने पर आप नेचुरल तरीके से अपने हाइट को बढ़ा सकते हैं:

1. ताड़ासन ( Tadasana/ Mountain pose )

     इस योगासन को करने से शरीर की सभी मांसपेशियों में फैलाव  होता है। ताड़ासन करने के लिए एकदम सीधा खड़े होकर शुरुआत करें। हाथों को भी सीध में रखें। फिर लंबी सांस लेते हुए दो हाथों को जोड़कर आसमान की ओर धीरे-धीरे उठाए। इसके बाद दोनों पैरों की एड़ियों को उठाते हुए पंजों के बल खड़े हो जाए। ऐसी स्थिति में शरीर को पूरी तरह से स्ट्रेच  रखें। कुछ देर तक इसी स्थिति में रहने के बाद मूल स्थिति में आ जाए। लंबाई बढ़ाने के लिए प्रतिदिन 10 से 12 बार लगभग 15 मिनट तक ये आसन करना चाहिए।

 2. शीर्षासन (Shirshasana )

    यह योगासन सिर के बल खड़े होकर किया जाता है, इसलिए इसे शीर्षासन कहते हैं। इस आसन के लिए पहले वज्रासन मुद्रा ( पैरों को घुटने से मोड़कर सीधे बैठना ) में आए। अब आगे की ओर झुकते हुए दोनों हाथों को एक सीध में कोहनियों से जमीन पर टिकाएं।

    दोनों हाथों की उंगलियों को बांध ले। इसके बाद फिर  सिर को दोनों हाथों के बीच में रखकर जमीन की ओर शीर्ष का भार दे और अब धीरे-धीरे शरीर को ऊपर की ओर उठाते हुए शरीर को सिर के बल सीधा करें। इस योगासन को 30 सेकेंड से शुरुआत कर अभ्यास के बाद 3 मिनट तक किया जा सकता है

3. भुजंगासन ( Bhujangasan/ Cobra Pose )

     भुजंगासन को सर्प मुद्रा आसन भी कहा जाता है। इसे करने के लिए जमीन पर पेट के बल लेट जाए, फिर हाथों की हथेली को फर्श पर रख कर गहरी सांस लेते हुए अपनी छाती को जमीन से धीरे-धीरे ऊपर उठाएं और छत की ओर देखने का प्रयास करें। प्रतिदिन 15 सेकंड इस आसन में रहे, जब अभ्यास हो जाए तो धीरे-धीरे समय को अपने अनुसार बढ़ा सकते हैं।

4. पश्चिमोत्तनासन (Pashchimottanasana)

   पैरों को सामने की ओर से सीधे में रखकर  रीड की हड्डी को सीधा रखते हुए बैठे। फिर गहरी सांस लीजिए, सांस को छोड़ते हुए कूल्हों के जोर से आगे की ओर झुके। अपने हाथों को पैरों के पास ऐसे ले जाये, कि दोनों हाथों से पैरों के तलवे और नाक से घुटने का स्पर्श हो। योगासन को प्रतिदिन 3 से 5 बार दोहराना चाहिए।

5. वृक्षासन ( Vrikshasana / Tree Pose )

    वृक्षासन करने के लिए जमीन पर सीधे खड़े हो जाएं। अपने राइट घुटने को मोड़ कर लेफ्ट पैर की जांघ पर रखें। लेफ्ट पैर एक सीध में होना चाहिए। अब गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथों को कानों से सटाकर ऊपर की ओर करते हुए एक साथ जोड़कर रखें। चूंकि यह एक पैर पर खड़े होने वाला आसन है। इसलिए एक पैर से 1 मिनट करने के बाद दूसरे पैर से पुनः 1 मिनट खड़े होने का प्रयास करें। कम से कम 5 बार ये प्रयास करें।

6. त्रिकोणासन ( Trikonasana/ Triangle Pose )

    यह तीन कोण वाला आसन है, जिसे करने के लिए दोनों पैरों के बीच 2 से 3 फुट का गैप रखना होता है। दाहिने पैर को दाये साइड मोड़कर अपने कंधों के बराबर दोनों हाथों को फैलाए। फिर गहरी सांस लेते हुए दाहिने पैर की तरफ झुकते हुए दाहिने हाथ से दाहिने पैर को छूने का प्रयास करें। फिर धीरे-धीरे करके वापसी मुद्रा में आए। प्रतिदिन दोनों पैरों के तरफ 1 से 3 बार ये आसन करना चाहिए, इससे लाभ होता है।

       हमारे द्वारा बताए गए इन 6 आसन को अपनी दिनचर्या में नियमित रूप से शामिल करने के बाद निश्चित ही आपके हाइट में ग्रोथ होगी, लेकिन योगासन से परिणाम धीरे-धीरे प्राप्त होता है, इसलिये आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

     यदि आप 30 दिन में हाइट कैसे बढ़ाये, जैसे सवालों के जवाब तलाश रहे है, तो आपको योगासन के साथ कुछ बता हमारे बताएं गए कुछ टिप्स भी अपनाने पड़ेंगे :

1. अपनी डाइट में फाइबर और प्रोटीन युक्त भोजन को शामिल करें,  जंक फूड से बचें।

2. पनीर और हरी साग सब्जियों का सेवन ज्यादा मात्रा में करें।

3. सोने से पहले एक गिलास दूध का सेवन करें।

4. पर्याप्त नींद लें।

5. पीठ के बल सीधे मुद्रा में सोए।

6. गेहूं के दाने के बराबर चूना का सेवन रोज करें।

7. रोज 3 से 5 सेकंड लटकने वाला वर्कआउट करें।

8. भरपूर पानी पिए ताकि विषाक्त पदार्थ बाहर निकले और शरीर का ग्रोथ हो।

 योगा करने का सही टाइम क्या है?

     सुबह सूर्यास्त के पहले और शाम को सूर्यास्त के ठीक बाद योग करने का सही टाइम बताया गया है। योग करने के पहले नहा ले या फिर योग करने के एक घंटे बाद नहाए तो फायदेमंद होगा। हर दिन एक फिक्स टाइम में खाली पेट ही योगा करना अच्छा माना गया है।

 सुबह करने वाले योग कौन से हैं?

   सुबह के करने वाले योग में सभी योगासन शामिल है। यह एक अच्छा समय रहता है, क्योंकि भरपूर नींद के बाद शरीर के पास आवश्यक ऊर्जा होता है।

 योगनिद्रा क्या है?

    सुबह बिस्तर पर किए जाने वाले आसन में एक है योगनिद्रासन। यदि आपको बहुत ज्यादा आलस फील हो रहा है, तो आपके लिए योगनिद्रासन काफी लाभदायक होगा। यह सुबह नींद से जागने के बाद बिस्तर पर ही किया जा सकता है। योग निद्रा का मतलब होता है जागते हुए सोना।

      दोस्तों, आज हमारे इस ” कुछ सीखे ” के लेख में आपको योग और योग से जरूरी जानकारी के साथ हाइट बढ़ाने वाले योगासन के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसलिए लेख को पढ़ने के बाद उम्मीद है कि आप How to increase height by yoga in one week? yoga to increase height after 18? yoga to increase height after 20? yoga to increase height after 25? जैसे सवालों के जवाब  तलाश रहे है, तो हमारे  इस लेख से आपको अपने सभी सवालों के मिल गए होंगे। लेख पसंद आया हो, तो कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दे।

     धन्यवाद! 

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फैमिली बिजनेस क्या है ? - कुछ सीखे · 04/07/2022 at 7:19 pm

[…] ऊंचाई बढ़ाने के लिए कौन सा योगासन किया… […]

एनएरोबिक व्यायाम क्या है ? - Health and Fitness - कुछ सीखे · 16/07/2022 at 5:39 pm

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