अगर आप अपने गार्डन के पौधों के लिये अच्छी पोषक तत्व को ढूंढ रहे है, तो आप बोन मील को जरूर आजमायें। ये एक ऐसा फ़र्टिलाइज़र है, जो हमेशा आपके पौधों को हरा भरा रखता है। इस आर्टिकल में हम, बोन मील से पौधों को क्या फायदा होता है , से संबंधी जानकारी आपसे साझा करेंगे।आजकल हर कोई अपने घर में एक मिनी गार्डन रखने का शौक रखता है। कुछ लोग के पास जगह की कमी होने की वजह से वे अपने मिनी गार्डन के लिये अपने बालकनी में या फिर छत का इस्तेमाल करते है। 

        बागबान में फिर चाहे फूल का हो या सब्जियों का पौधा उसे लगाने के बाद उसकी देखरेख भी जरूरी होती है, ताकि आपका बागबान हमेशा हरा भरा दिखाई दे। इसके लिये जरूरी होती है , कुछ खाद/फ़र्टिलाइज़र का उपयोग करना। अब आपके मन मे सवाल होंगे , आखिर कौन से खाद/फ़र्टिलाइज़र का उपयोग , आपको अपने बागवान में करना चाहिये। क्या बोन मील आपके पौधों के लिये सही फ़र्टिलाइज़र है। बोन मील में ऐसा क्या है, जो पौधों को हरा भरा रखता है। ये कार्बनिक है या नही । तो आपको ज्यादा सोचने की जरुरत नही । 

आगे इस आर्टिकल में हम आपको बोन मील से जुड़ी सभी जरूरी बातों के बारे विस्तार से बतायेंगे। साथ ही आपके गार्डन के पौधौ के लिये आवश्यक पोषक तत्वों के बारे मे भी चर्चा करेंगे।

 आइये जानते है, विस्तार से –

बोन मील फ़र्टिलाइज़र क्या है

इसे हिंदी में अस्थि उर्वरक के नाम से जाना जाता है। इसके नाम से ही स्पष्ट है कि ये फ़र्टिलाइज़र  अस्थि/हड्डी से बनाया जाता है। वास्तविक रूप में इस फर्टीलाइजर को  जानवर जैसे कि बकरी, मुर्गी, कबूतर, सूअर,आमतौर पर गाय या अन्य जीव के हड्डियों के चूरण से तैयार किया जाता है। यह शत प्रतिशत कार्बनिक होता है । 

        जानवरो के हड्डियों के चूरा से मशीनीकरण द्वारा स्टीम के प्रकिया से बैक्टेरिया और अन्य विषाक्त तत्वो को बाहर निकाल लिया जाता है, जिससे पौधों को किसी प्रकार का नुकसान ना हो। 

           बोन मील , हड्डियों का चूरा है, इसलिये इसमें कैल्शियम होना तो आम बात है। इसके अलावा इस फ़र्टिलाइज़र में एन-पी-के का कम्पोजीशन 2-22-0 या 3-15-0 के अनुपात में पाया जाता है। एन-नाइट्रोजन , पी-फास्फोरस और के-पोटेशियम होता है। उवर्रक के पैकेट पर यह रेशियो लिखा होता है।

बोन मील उपयोग किन पौधों में किया जा सकता है

इसका उपयोग पत्तों, फूलों, फलों और जड़ो वाले सभी पौधों में किया जा सकता है। ये सभी प्रकार के पौधों के लिये लाभदायक है, क्योंकि हर पौधों के विकास में फास्फोरस और नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है, जो कि इस फर्टिलाइजर में भरपूर मात्रा में होता है। गुलाब के पौधौ में इसका काफी अच्छा रिजल्ट देखने को मिला है।

बोन मील से पौधो को होने वाले फायदे

bone meal plant benefit

पौधों के अच्छे विकास के लिये पोषक तत्वों से युक्त खाद का उपयोग करना जरूरी होता है। बोन मील को भी पोषक तत्वों से भरपूर खाद माना जाता है। बोन मील से पौधों को क्या फायदा होता है ? हम बताते है, यह फर्टिलाइजर पूर्ण रूप से कार्बनिक होने के कारण पौधौ के लिये बहुत फायदेमंद होते है। इसमें मौजूद जरूरी मिनरल्स मिट्टी के साथ रिएक्ट करके पौधौ के विकास में अच्छा योगदान करते है। कैल्शियम यानी मजबूती , ये पौधौ की कोशिका को मजबूत और स्वस्थ बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाते है। तो वही फास्फोरस खनिज प्रकाश संश्लेषण,  जड़, फूल और बीज उत्पादन, पौधे के भीतर ऊर्जा हस्तांतरण और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में अपनी सक्रियता दर्शाता है। 

  • फूलों की पैदावार और सेहत में मदद मिलती है।
  • पौधे की पूरे के तने में मजबूती आती है।
  • जड़ों का विकास तेजी से होता है।
  • पौधौ में किसी प्रकार के कीड़े या फंगस लगने की संभावना खत्म हो जाती है।
  • इसके दुर्गंध के कारण कुत्ता या कोई जानवर उस पौधौ के पास नही आ पाता है।
  • यह प्राकृतिक अपघटन प्रक्रिया के तहत मिट्टी में रोगाणुओं के विघटन को सरल बनाता है।

बोन मील से पौधो को होने वाले नुकसान 

हालाँकि इस फर्टिलाइजर के इस्तेमाल से कोई ज्यादा हानि नही है। फिर भी जो लोग शाकाहारी है, उनके लिये इसे अपने साग सब्जियों के बागबान में उपयोग किया जाना उचित नही है। अपितु इस उर्वरक में कमी में कह सकते कि इसका उपयोग सीमित मात्रा में किया जाये अन्यथा ये पौधौ को जला भी सकती है। 

              इसके उपयोग के दौरान मिट्टी का पीएच 7 से नीचे यानी कि एसिडिक होनी चाहिये, तभी ये पौधौ के साथ क्रिया कर पायेगा। इस उवर्रक क्रिया पूर्ण होने में समय लगता है। इसके लिये आपको 2 से 3 महीने तक इंतेज़ार भी करना पड़ सकता है।

बोन मील को उपयोग करने के तरीके 

बोन मील के उपयोग के पूर्व आपको बागबान के मिट्टी की जांच करा लेनी चाहिये , क्योकि ये फर्टिलाइजर केवल एसिडिक (अम्लीय) मिट्टी के साथ ही अपना रिएक्ट कर पाता है। मिट्टी की पीएच नाप लेने के बाद आपको पता चलता है कि मिट्टी एसिडिक नही है तो आप मिट्टी में लेमन जूस डालने के कुछ समय बाद 1 से 2 चम्मच प्रति गमले के हिसाब से बोन मील पौधों में डाल सकते है। 

      इसे खेत मे प्रति 10 स्क्वायर में एक पाउण्ड में उपयोग किया जा सकता है।मिट्टी को एसिडिक बनाने के लिये खट्टे फलों के छिलके को सुखाकर उसके बाद उसे पीसकर भी मिट्टी में डाला जा सकता है।अम्लीय मिट्टी में ही बोन मील अपने कार्य को करने योग्य होता है।

      यह भी ध्यान देवे की यह उर्वरक पानी में घुलनशील नहीं होता, इसको सीधेतौर पर मिट्टी में ही डालना होता है। इसे पौधों की जड़ों के पास मिट्टी में डालना चाहिये, जिससे ये अपना पोषक तत्व पौधों की जड़ों को आसानी से दे सके।  एक बार खाद डालने के उपरांत एक से दो महीने का अन्तराल बनाने के बाद ही दोबारा खाद डालने की प्रकिया को दोहराये। 

बोन मील की क्या कीमत है 

  इस की मार्केट प्राइस अलग अलग कंपनियों के हिसाब से एक किलोग्राम के लिये 80 रुपये से लेकर 400 रुपये तक है। 

बोन मील के विकल्प 

वैसे तो बोन मील पौधो के कितना फायदेमंद है, इसके बारे में तो आपको ऊपर बता ही दिया गया है, इसके बाद भी आपको बोन मील उपयोग करना उचित नही लग रहा हो तो आप पूर्ण कार्बनिक गोबर खाद जो गाय, बकरी , भैंस या ऊंच किसी के गोबर से बनाई हो , उसका उपयोग कर सकते है। 

     इसके अलावा आप केचुआ द्वारा बनाया गया वर्मी कंपोस्ट खाद का भी उपयोग कर सकते है। ये पूर्ण रूप नेचुरल होते है, इसे आप खटाल या किसानों से कम कीमत में प्राप्त कर सकते है। 

दोस्तों , उम्मीद है आपको बोन मील से पौधों को क्या फायदा होता है ? इस सवाल के जवाब के साथ-साथ अपने बागवान में बोन मील के उपयोग करने संबंधी सारी जानकारी, इस लेख से मिल गई होगी । इसके बाद भी आपको कुछ जानकारी चाहिये हो तो आप कमेंट बॉक्स में अपने विचार साझा कर सकते है।

धन्यवाद !

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1 Comment

पित्त की थैली मे पथरी का इलाज कैसे करे - कुछ सीखे Health and Fitness · 31/07/2021 at 3:39 pm

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